विस्तृत उत्तर
जनलोक प्रलय की अग्नि से अछूता और सुरक्षित रहता है। यहाँ ब्रह्मा के मानस पुत्र, प्रजापति, नैष्ठिक ब्रह्मचारी, महान सिद्ध योगी और ऋषि निवास करते हैं। ये आत्माएँ ब्रह्मांड के सुचारू संचालन, आध्यात्मिक ज्ञान के संरक्षण और प्रलय के बाद नई सृष्टि के बीजारोपण में भूमिका निभाती हैं। नैमित्तिक प्रलय के दौरान महर्लोक के ऋषि और प्रजापति भी जनलोक में आश्रय लेते हैं, और ब्रह्मा की रात्रि समाप्त होने पर नई सृष्टि में सहायता करते हैं। इस प्रकार जनलोक आध्यात्मिक ज्ञान की निरंतरता का सुरक्षित केंद्र बनता है।
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