विस्तृत उत्तर
महाभारत के सभा पर्व (अध्याय 7) में देवर्षि नारद द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को इन्द्र की राजसभा सुधर्मा में उपस्थित ऋषियों का विस्तृत वर्णन दिया गया है। नारद जी के अनुसार इस सभा में वे ब्रह्मर्षि और राजर्षि निरंतर आते-जाते रहते हैं जो साक्षात ब्रह्मा जी के समान प्रभावशाली हैं। इनमें प्रमुख हैं — महर्षि पराशर, पर्वत मुनि, सावर्णि, गालव, शंख, लिखित, गौरशिरा, महर्षि दुर्वासा, क्रोधन, श्येन, दीर्घतमा, याज्ञवल्क्य, भालुकि, उद्दालक, श्वेतकेतु, ताण्डव्य, भाण्डायनि, हविष्मान, गरिष्ठ, राजा हरिश्चन्द्र, व्यासदेव (पराशर नंदन), कृषीवल, वातस्कन्ध, विशाख, विधाता, काल, करालदन्त, त्वष्टा, विश्वकर्मा और गंधर्व तुम्बुरु। देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य भी इस सभा में नित्य विराजमान रहते हैं।
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