विस्तृत उत्तर
## वेदों में ऋषियों का स्थान
ऋषि कौन हैं? निरुक्त (2/11) के अनुसार — 'ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः' — ऋषि वे हैं जिन्होंने मंत्रों को देखा (द्रष्टा हैं), न कि रचे। वे समाधि में ब्रह्म-सत्य के साक्षात्कारी हैं।
ऋषि और वेद का सम्बन्ध: प्रत्येक वेद-सूक्त के साथ उसके ऋषि, देवता और छंद का उल्लेख होता है। ऋषि = मंत्र का द्रष्टा, देवता = मंत्र का विषय, छंद = मंत्र का वृत्त।
प्रमुख वैदिक ऋषि
- ▸विश्वामित्र — गायत्री मंत्र के द्रष्टा (ऋग्वेद मण्डल 3)
- ▸वशिष्ठ — मण्डल 7 के ऋषि
- ▸अत्रि — मण्डल 5
- ▸भरद्वाज — मण्डल 6
- ▸कण्व — मण्डल 8
- ▸अगस्त्य — मण्डल 1 के महर्षि
सप्तर्षि परंपरा: बृहदारण्यक उपनिषद में सात महाऋषि सृष्टि के आदि में ब्रह्मा से वेद-ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य-लोक तक ले आए।
स्त्री-ऋषिकाएं: लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी, घोषा, अपाला, विश्ववारा आदि के मंत्र ऋग्वेद में सुरक्षित हैं।
ऋषि का स्थान: वे धार्मिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक और शिक्षक थे। उनके आश्रम ज्ञान के केन्द्र थे।





