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सप्तर्षि प्रश्नोत्तरी — 9 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित सप्तर्षि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

लोक

मन्वन्तर क्या होता है?

मन्वन्तर वह कालखंड है जिसमें एक मनु शासन करता है। एक कल्प में 14 मन्वन्तर होते हैं। प्रत्येक में एक मनु, इन्द्र और सप्तर्षि ब्रह्मांड का प्रशासन संभालते हैं।

मन्वन्तरमनुसप्तर्षि
लोक

मन्वन्तर के बाद ऋषि महर्लोक में क्यों आते हैं?

एक मन्वन्तर के बाद सेवानिवृत्त इन्द्र, सप्तर्षि और मनु विश्राम और परब्रह्म-ध्यान के लिए महर्लोक में आते हैं और सत्यलोक की प्रतीक्षा करते हैं।

मन्वन्तरमहर्लोकसप्तर्षि
लोक

ध्रुवलोक का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

ध्रुवलोक स्वर्लोक की सर्वोच्च सीमा है जो सप्तर्षि मंडल से 13 लाख योजन ऊपर है। शिशुमार चक्र की धुरी ध्रुवलोक है जिसके चारों ओर सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।

ध्रुवलोकस्वर्लोकसर्वोच्च सीमा
विशेष काल गणना

सप्तर्षियों का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन हजार तीस वर्ष सप्तर्षियों के एक वर्ष के बराबर माने गए हैं।

सप्तर्षिसप्तर्षि वर्षमनुष्य वर्ष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने सप्तर्षियों की शिवनिन्दा सुनकर क्या उत्तर दिया?

पार्वतीजी ने कहा — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्मों तक या तो शिवजी को वरूँगी या कुमारी रहूँगी। स्वयं शिवजी मना करें तब भी नारदजी का उपदेश नहीं छोडूँगी। ऋषि प्रसन्न हुए — 'जय जगदम्बिके भवानी!'

बालकाण्डपार्वती दृढ़ संकल्पसप्तर्षि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने शिवजी के बारे में क्या-क्या बुराइयाँ बताईं?

शिवजी को बताया — (1) अवगुणों का भवन, (2) निर्गुण, निलज, (3) कुबेष (भस्म-साँप-खोपड़ी), (4) अकुल (कुलहीन), (5) अगेह (बेघर/श्मशानवासी), (6) दिगम्बर (नग्न), (7) उदासीन। ये सब परीक्षा के लिये कहा — पार्वतीजी का संकल्प जाँचने हेतु।

बालकाण्डसप्तर्षिशिव दोष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने पार्वतीजी से क्या कहकर उनकी परीक्षा ली?

सप्तर्षियों ने शिवजी को अवगुणों का भवन, निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, दिगम्बर बताया। नारदजी के उपदेश की भी आलोचना की — कि जिसने सुना उसका घर बर्बाद हुआ। यह सब पार्वतीजी का संकल्प डिगाने के लिये था।

बालकाण्डसप्तर्षिपरीक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

देवताओं ने पार्वतीजी की परीक्षा के लिये किन्हें भेजा?

सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा। ऋषियों ने पार्वतीजी को देखा — 'मूरतिमंत तपस्या जैसी' — मानो मूर्तिमान तपस्या ही हो। उन्होंने प्रश्न पूछे और शिवजी की निन्दा करके पार्वतीजी का संकल्प डिगाने का प्रयास किया।

बालकाण्डसप्तर्षिपार्वती परीक्षा
वेद ज्ञान

वेदों में ऋषियों का क्या स्थान है?

वेदों में ऋषि मंत्रों के द्रष्टा (मंत्रद्रष्टा) हैं — रचयिता नहीं। निरुक्त (2/11) कहता है — 'ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः।' विश्वामित्र, वशिष्ठ, अत्रि, भरद्वाज आदि सप्तर्षि वैदिक ज्ञान को मनुष्य-लोक तक ले आए।

ऋषिवेदद्रष्टा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।