विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण और वायु पुराण के अत्यंत सूक्ष्म खगोलीय और मन्वन्तर विवरणों के अनुसार यहाँ अतीत, वर्तमान और भविष्य के मन्वन्तरों के ऋषि, मनु और श्रेष्ठ पितृगण भी निवास करते हैं। एक मन्वन्तर (मनु का काल) में इन्द्र, सप्तर्षि और मनु ब्रह्माण्ड का प्रशासन संभालते हैं। जब एक मन्वन्तर समाप्त होता है तो उस मन्वन्तर के शासक देव और ऋषि अपने अधिकार पदों से मुक्त होकर विश्राम और परब्रह्म के ध्यान हेतु महर्लोक में ही आ जाते हैं। ब्रह्माण्ड पुराण महर्लोक के इन निवासियों की आध्यात्मिक विशेषताओं का स्पष्ट वर्णन करता है। इन महर्षियों का आध्यात्मिक तेज और प्रभाव साक्षात् सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के समान होता है। ये ऋषि महर्लोक में आकर सत्यलोक जाने की शांतिपूर्वक प्रतीक्षा करते हैं।
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