लोकमन्वन्तर क्या होता है?मन्वन्तर वह कालखंड है जिसमें एक मनु शासन करता है। एक कल्प में 14 मन्वन्तर होते हैं। प्रत्येक में एक मनु, इन्द्र और सप्तर्षि ब्रह्मांड का प्रशासन संभालते हैं।#मन्वन्तर#मनु#सप्तर्षि
लोकमन्वन्तर के बाद ऋषि महर्लोक में क्यों आते हैं?एक मन्वन्तर के बाद सेवानिवृत्त इन्द्र, सप्तर्षि और मनु विश्राम और परब्रह्म-ध्यान के लिए महर्लोक में आते हैं और सत्यलोक की प्रतीक्षा करते हैं।#मन्वन्तर#महर्लोक
लोकवृत्रासुर के वध की कथा में स्वर्लोक की राजनीति क्या दर्शाती है?वृत्रासुर की कथा दर्शाती है कि स्वर्लोक में भी यज्ञ-शक्ति और सैन्य बल के बीच संघर्ष होता है। इन्द्र जैसे शक्तिशाली राजा भी भयभीत हो सकते हैं और संधि के लिए बाध्य हो सकते हैं।#वृत्रासुर#स्वर्लोक#राजनीति
लोकपुष्कर द्वीप के मानसोत्तर पर्वत पर किन देवताओं की राजधानियाँ हैं?मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र (पूर्व), यम (दक्षिण), वरुण (पश्चिम) और चंद्र देव (उत्तर) की राजधानियाँ हैं। यह स्वर्लोक का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है।#मानसोत्तर पर्वत#पुष्कर द्वीप#इन्द्र
लोकमहर्षि दधीचि की अस्थियों का स्वर्लोक से क्या संबंध है?महर्षि दधीचि ने स्वर्लोक की रक्षा के लिए अपना शरीर त्याग दिया। उनकी अस्थियों से बने वज्र से इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। यह बलिदान स्वर्लोक के इतिहास में अमर है।#दधीचि#अस्थि#वज्र
लोकवृत्रासुर और इन्द्र का युद्ध कैसे हुआ?त्वष्टा ने पुत्र विश्वरूप के वध से क्रोधित होकर हवन से वृत्रासुर उत्पन्न किया। इन्द्र भयभीत हुए, फिर दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।#वृत्रासुर#इन्द्र#युद्ध
लोकयज्ञ करने से स्वर्ग मिलता है क्या?हाँ, यज्ञ स्वर्ग प्राप्ति का प्रमुख मार्ग है। स्वयं इन्द्र ने 100 यज्ञों से स्वर्ग प्राप्त किया। लेकिन यह स्वर्ग पुण्य क्षीण होने पर समाप्त हो जाता है।#यज्ञ#स्वर्ग#इन्द्र
लोकइन्द्र की राजसभा का क्या नाम है?इन्द्र की राजसभा का नाम 'सुधर्मा' है जिसे 'पुष्कर-मालिनी' भी कहते हैं। यह अमरावती के मध्य में है और स्वर्लोक का शासन यहीं से होता है।#इन्द्र#राजसभा#सुधर्मा
लोकअमरावती नगरी क्या है?अमरावती देवराज इन्द्र की राजधानी है जो 800 मील की परिधि में फैली है। इसे देवपुर और पूषाभासा भी कहते हैं। यह जाम्बूनद स्वर्ण और हीरों से बनी है।#अमरावती#इन्द्र#राजधानी
लोकस्वर्लोक के अधिपति कौन हैं?स्वर्लोक के अधिपति देवराज इन्द्र हैं जिन्होंने सौ यज्ञ (शतक्रतु) करके यह पद प्राप्त किया। वे शची सहित अमरावती में स्वर्ण-सिंहासन पर विराजते हैं।#स्वर्लोक#इन्द्र#अधिपति
लोकब्रह्मपुरी को कौन घेरे हुए है?ब्रह्मपुरी को आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हैं — इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु, कुबेर और ईश (शिव)।#ब्रह्मपुरी#अष्टदिक्पाल#इन्द्र
लोकद्वादश आदित्यों के नाम क्या हैं?द्वादश आदित्य हैं: इन्द्र, धाता, भग, पूषा, मित्र, वरुण, अर्यमा, विवस्वान, सविता, त्वष्टा, विष्णु और अंश।#द्वादश आदित्य नाम#इन्द्र#मित्र
आद्याशक्ति का प्राकट्यमहिषासुर के आतंक की कथा क्या है?100 वर्षों तक देव-असुर संग्राम → महिषासुर ने देवताओं को पराजित किया → स्वर्ग का अधिपति बना → सूर्य, अग्नि, वायु, चंद्र, यम, वरुण के अधिकार छीने → देवता ब्रह्मा-विष्णु-शिव के पास पहुँचे → त्रिमूर्ति को क्रोध आया।#महिषासुर#देवता पराजित#स्वर्ग अधिकार