विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण (देवी महात्म्य) के अनुसार, पूर्वकाल में देवताओं और असुरों के बीच पूरे सौ वर्षों तक भयंकर संग्राम हुआ। उस समय असुरों का सेनापति महापराक्रमी महिषासुर था और देवताओं का नेतृत्व देवराज इन्द्र कर रहे थे।
महिषासुर के प्रचंड बल और माया के समक्ष देवता पराजित हो गए और महिषासुर स्वर्ग का अधिपति (इन्द्र) बन बैठा। उसने सूर्य, अग्नि, वायु, चंद्रमा, यम और वरुण के अधिकार स्वयं छीन लिए। आश्रयहीन और पदच्युत देवता ब्रह्मा जी को आगे करके भगवान शिव और विष्णु के पास पहुँचे और अपनी व्यथा सुनाई।
देवताओं के मुख से महिषासुर के अत्याचारों का वृत्तांत सुनकर भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा जी को अत्यंत क्रोध आया।




