विस्तृत उत्तर
मार्कंडेय पुराण में वृत्रासुर की कथा स्वर्लोक की राजनीतिक और सामरिक प्रकृति को स्पष्ट करती है। जब देवराज इन्द्र ने विश्वरूप (त्वष्टा के पुत्र) का वध कर दिया तो क्रोधित होकर प्रजापति त्वष्टा ने यज्ञ से वृत्रासुर उत्पन्न किया। यह कथा दर्शाती है कि स्वर्लोक की राजनीति में यज्ञ, शक्ति और संघर्ष का गहरा संबंध है। इन्द्र ने विश्वरूप का वध किया जो एक प्रकार का राजनीतिक अपराध था। इस पर ऋषि त्वष्टा ने यज्ञीय शक्ति से प्रतिशोध लिया। इन्द्र भयभीत होकर संधि के लिए सप्तर्षियों को भेजने पर विवश हुए जो इन्द्र की राजनीतिक कमजोरी को दर्शाता है। बाद में महर्षि दधीचि के बलिदान से समस्या हल हुई। यह कथा सिद्ध करती है कि स्वर्लोक भी युद्ध, भय, राजनीतिक संघर्ष और अस्थिरता से पूर्णतः मुक्त नहीं है।
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