विस्तृत उत्तर
हाँ, शास्त्रों के अनुसार यज्ञ स्वर्ग प्राप्ति का एक प्रमुख मार्ग है। स्वयं देवराज इन्द्र ने सौ यज्ञों (शतक्रतु) का अनुष्ठान पूर्ण करके अपने तपोबल से स्वर्लोक पर विजय प्राप्त की थी। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि महान यज्ञों से स्वर्ग प्राप्त होता है। भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो लोग यज्ञों के माध्यम से स्वर्लोक को अंतिम लक्ष्य मानते हैं वे स्वर्ग का भोग करते हैं। स्वर्लोक के सभी द्वीपों के निवासी वेदोक्त अनुष्ठान करते हुए स्वर्ग के द्वार पर वैदिक अनुष्ठान करते हैं। अमरावती के निवासियों में वे पुण्यात्मा मनुष्य भी हैं जिन्होंने पृथ्वी जीवन में महान यज्ञ किए हैं। परंतु गीता यह भी बताती है कि यज्ञ से मिला स्वर्ग का सुख पुण्य क्षीण होने पर समाप्त हो जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





