विस्तृत उत्तर
महर्षि दधीचि की अस्थियों का स्वर्लोक से अत्यंत गहरा और पवित्र संबंध है। मार्कंडेय पुराण के वर्णन के अनुसार जब इन्द्र को वृत्रासुर के वध के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली अस्त्र की आवश्यकता थी तब महर्षि दधीचि ने देवताओं और स्वर्लोक की रक्षा के लिए अपना शरीर स्वेच्छा से त्याग दिया। उनकी पवित्र अस्थियों से 'वज्र' नामक दिव्य अस्त्र का निर्माण किया गया। इसी वज्र से देवराज इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया और स्वर्लोक को उस महाभयंकर असुर से मुक्त किया। महर्षि दधीचि का यह अपूर्व बलिदान उन्हें स्वर्लोक के इतिहास में अमर कर गया। इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि स्वर्लोक की सुरक्षा के लिए महान ऋषियों का बलिदान और सहयोग भी आवश्यक होता है।
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