विस्तृत उत्तर
मार्कंडेय पुराण में वृत्रासुर की कथा का विस्तृत वर्णन है। जब देवराज इन्द्र ने विश्वरूप (त्वष्टा के पुत्र) का वध कर दिया तो क्रोधित होकर प्रजापति त्वष्टा ने अपनी एक जटा उखाड़कर अग्नि में हवन कर दिया। उस होमकुंड से 'वृत्र' नामक एक भयंकर असुर उत्पन्न हुआ जिसका शरीर कोयले के पहाड़ के समान काला था और जिसकी दाढ़ें अत्यंत विशाल थीं। उस महान असुर को देखकर इन्द्र अत्यंत भयभीत हो गए और उन्होंने संधि करने के लिए सप्तर्षियों को उसके पास भेजा। बाद में महर्षि दधीचि की अस्थियों से वज्र का निर्माण करके इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। यह कथा इस बात को प्रमाणित करती है कि स्वर्लोक भी युद्ध, भय और अस्थिरता से पूर्णतः मुक्त नहीं है।
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