विस्तृत उत्तर
मेरु पर्वत के शिखर पर स्थित ब्रह्मपुरी (शातकौम्भी) को चारों ओर से आठ लोकपालों (अष्ट-दिक्पालों) की स्वर्ण और मणियों से निर्मित नगरियों ने घेर रखा है। ये आठ दिक्पाल और उनकी नगरियाँ इस प्रकार हैं — देवराज इन्द्र (पूर्व), अग्नि (आग्नेय), यम (दक्षिण), निर्ऋति (नैऋत्य), वरुण (पश्चिम), वायु (वायव्य), कुबेर (उत्तर) और ईश अर्थात शिव (ईशान)। ये आठों दिक्पाल अपनी-अपनी नगरियों में स्थित होकर ब्रह्मपुरी की रक्षा करते हैं और उसे चारों ओर से घेरे रहते हैं। ब्रह्मपुरी चौकोर है और दस हजार योजन विस्तृत है। इस प्रकार सुमेरु पर्वत का शिखर ब्रह्मपुरी और आठ दिक्पाल-नगरियों सहित देव-जगत का सर्वोच्च और परम पावन केंद्र है।
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