विस्तृत उत्तर
अमरावती स्वर्लोक का सबसे प्रमुख और भव्य क्षेत्र है जो देवराज इन्द्र की राजधानी है। मार्कंडेय पुराण, महाभारत और अन्य पुराणों में इसका अत्यंत विस्तृत वर्णन मिलता है। पुराणों में इसे देवपुर (देवताओं का नगर) और पूषाभासा (सूर्य के समान तेजस्वी) भी कहा गया है। महाभारत और पुराणों के अनुसार देवराज इन्द्र की यह नगरी आठ सौ मील की परिधि में फैली हुई है और इसकी ऊँचाई लगभग चालीस मील है। इस नगरी के निर्माण में सांसारिक ईंट, पत्थर या मिट्टी का रत्ती भर भी उपयोग नहीं हुआ है बल्कि यह पूरी तरह से विशुद्ध स्वर्ण (जाम्बूनद) और हीरों से निर्मित है। अमरावती में देव, दानव, गंधर्व, किन्नर, उरग और रक्षक निवास करते हैं। वे भाग्यशाली मनुष्य जिन्होंने महान यज्ञ किए हैं और पूर्ण धार्मिक जीवन व्यतीत किया है वे भी देवताओं के समान रूप धारण करके इस नगरी में निवास का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक


