विस्तृत उत्तर
कात्यायनी देवी के अवतार की कथा दैत्य महिषासुर के वध से जुड़ी हुई है।
महिषासुर ने कठिन तप द्वारा ब्रह्माजी से वरदान लिया था कि उसे कोई पुरुष देवता या मानव मार नहीं सकेगा। उसने स्वर्ग से इंद्र आदि देवताओं को निकालकर अपना अधिकार जमा लिया। तब त्रिदेव ने अपनी-अपनी शक्ति का अंश निकाला और उन सभी शक्तियों के तेज से एक परम सुंदरी एवं दिव्य कन्या प्रकट हुई।
यह देवी रूप महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होकर उनकी पुत्री बनीं। महर्षि ने नौ दिनों तक उनकी पूजा की। दशवें दिन देवी ने महिषासुर से भयंकर युद्ध किया और तलवार से उसका वध कर दिया। इस प्रकार देवताओं को उनका स्वर्गलोक वापस मिला।
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