विस्तृत उत्तर
जब महिषासुर के आतंक से परेशान देवता त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के पास पहुंचे, तब सबने मिलकर अपनी-अपनी शक्ति का अंश निकाला।
उन सभी शक्तियों के तेज से एक परम सुंदरी एवं दिव्य कन्या प्रकट हुई। यह देवी रूप महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होकर उनकी पुत्री बनीं।
महर्षि ने श्रद्धापूर्वक उस कन्या का नाम कात्यायनी रखा और नौ दिनों तक उसकी पूजा की।
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