विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती और देवी भागवत पुराण में वर्णित है कि जब महिषासुर के अत्याचार से देवता अत्यंत पीड़ित हो गए तो उनके तेज के सम्मिलन से देवी दुर्गा प्रकट हुईं।
त्रिशूल देने का कारण — देवी दुर्गा स्वयं आदिशक्ति हैं — ब्रह्मांड की मूल शक्ति। त्रिशूल शिव के संहार-सामर्थ्य का प्रतीक है। महिषासुर का वध करने के लिए जो शक्ति चाहिए थी वह संहार-शक्ति त्रिशूल में ही थी। एक वर्णन के अनुसार भगवान शिव ने अपने शूल से एक अतिरिक्त त्रिशूल निकालकर देवी को भेंट किया।
दार्शनिक अर्थ — शिव ने देवी को त्रिशूल देना यह दर्शाता है कि शिव और शक्ति अभिन्न हैं। शिव की संहार-शक्ति जब शक्ति-स्वरूपा देवी के हाथ में आती है तो वह पूर्णतः प्रकट होती है। देवी दुर्गा ने इसी त्रिशूल से महिषासुर की छाती पर प्रहार करके उसका वध किया। इसीलिए वे 'महिषासुरमर्दिनी' कहलाईं।





