विस्तृत उत्तर
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्ग में असुरों के आतंक से त्रस्त देवताओं ने परम शक्ति का आह्वान किया। तब माता दुर्गा ने चंद्रघंटा रूप धारण किया ताकि महिषासुर जैसे दैत्यों का संहार किया जा सके।
एक मान्यता यह है कि नवरात्रि के नौ दिनों के युद्ध में तीसरे दिन देवी ने चंद्रघंटा रूप लेकर देवताओं की सेनाओं का नेतृत्व किया और असुरों के प्रमुख सेनापतियों का नाश किया।
महिषासुर द्वारा इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लेने की पौराणिक कथा में भी देवी पार्वती ने चंद्रघंटा रूप में युद्ध किया था।
उन्होंने सिंह पर आरूढ़ होकर तलवार, त्रिशूल, गदा आदि से असुरों का संहार किया और देवताओं को उनका स्वर्ग लौटा दिया।
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