विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण और वायु पुराण के अनुसार ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) में कुल 14 मन्वन्तर होते हैं। एक मन्वन्तर (मनु का काल) वह कालखंड है जिसमें एक विशेष मनु ब्रह्माण्ड के प्रजापति (शासक) होते हैं। प्रत्येक मन्वन्तर में एक मनु, एक इन्द्र, एक सप्तर्षि मंडल और एक विशेष देव-गण ब्रह्माण्ड का प्रशासन संभालते हैं। एक मन्वन्तर की अवधि लगभग 30 करोड़ 67 लाख मानवीय वर्षों की होती है। जब एक मन्वन्तर समाप्त होता है तो उस मन्वन्तर के शासक देव और ऋषि अपने अधिकार पदों से मुक्त होकर विश्राम और परब्रह्म के ध्यान हेतु महर्लोक में आ जाते हैं जबकि नए मनु, नए इन्द्र और नए सप्तर्षि अपने-अपने पद ग्रहण करते हैं।
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