विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक देवराज इन्द्र के शासन के अधीन है। महाभारत और पुराणों के अनुसार देवराज इन्द्र ने सौ यज्ञों (शतक्रतु) का अनुष्ठान पूर्ण करके अपने तपोबल से स्वर्लोक पर विजय प्राप्त की थी। इन्द्र अपनी अर्धांगिनी शची (इन्द्राणी) के साथ अमरावती नगरी में स्वर्ण-सिंहासन पर विराजमान होते हैं। उनके साथ साक्षात लज्जा, कीर्ति और कान्ति देवियां मूर्तिमान रूप धारण करके उपस्थित रहती हैं। इन्द्र के मस्तक पर एक अत्यंत दैवीय किरीट (मुकुट) शोभायमान रहता है और उनकी दोनों भुजाओं में लाल रंग के बाजूबंद सुशोभित होते हैं। उनके शरीर पर स्वच्छ श्वेत वस्त्र और कंठ में विचित्र पुष्पों की माला होती है। इनके अतिरिक्त अग्नि, वायु, वरुण, यम, कुबेर आदि अष्ट-दिक्पाल भी मानसोत्तर और सुमेरु पर्वत की दिशाओं में स्थित अपनी-अपनी स्वर्ण राजधानियों में निवास करते हैं।
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