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आद्याशक्ति का प्राकट्य⏱ 1 मिनट पठन

देवताओं के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य कैसे हुआ?

देवताओं के मुख से महिषासुर के अत्याचारों का वृत्तांत सुनकर भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा जी को अत्यंत क्रोध आया।

संक्षिप्त उत्तर

विष्णु, शिव, ब्रह्मा और सभी देवताओं के शरीरों से अत्यंत उग्र तेज निकला → एक स्थान पर एकत्रित हुआ → जाज्वल्यमान पर्वत समान तेजोपुंज ने दिव्य नारी का स्वरूप धारण किया → उनकी चमक से तीनों लोक प्रकाशित हो उठे। यही माँ दुर्गा का प्राकट्य था।

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विस्तृत उत्तर

देवताओं के मुख से महिषासुर के अत्याचारों का वृत्तांत सुनकर भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा जी को अत्यंत क्रोध आया। उनके क्रोध के परिणामस्वरूप सर्वप्रथम भगवान विष्णु के मस्तक से एक महान तेज (ज्योति) प्रकट हुआ। तदुपरांत भगवान शिव और ब्रह्मा जी के मस्तक से भी परम तेज उत्पन्न हुआ। इसके पश्चात इन्द्र, सूर्य, अग्नि, वायु, यम आदि सभी देवताओं के शरीरों से एक अत्यंत उग्र और प्रज्वलित तेज निकला।

मार्कण्डेय पुराण देवी के इस अलौकिक प्राकट्य का वर्णन इन शब्दों में करता है: 'अतुलं तत्र तत्तेज: सर्वदेवशरीरजम्। एकस्थं तदभून्नारी व्यालोकत्रयं त्विषा।।'

अर्थात, सभी देवों के शरीरों से निकला हुआ वह अतुलनीय तेज एक स्थान पर एकत्रित होकर एक जाज्वल्यमान पर्वत के समान प्रतीत होने लगा। उस अपार तेजोपुंज ने एक अत्यंत दिव्य और अलौकिक नारी का स्वरूप धारण कर लिया, जिसकी चमक से तीनों लोक प्रकाशित हो उठे।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

देवताओं के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य कैसे हुआ को संदर्भ सहित समझें

देवताओं के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य कैसे हुआ का सबसे सीधा सार यह है: विष्णु, शिव, ब्रह्मा और सभी देवताओं के शरीरों से अत्यंत उग्र तेज निकला → एक स्थान पर एकत्रित हुआ → जाज्वल्यमान पर्वत समान तेजोपुंज ने दिव्य नारी का...

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आद्याशक्ति का प्राकट्य प्रश्नोत्तर
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