विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत 700 श्लोकों का ग्रंथ 'दुर्गा सप्तशती' या 'देवी महात्म्य' शाक्त दर्शन का सर्वोत्कृष्ट और सबसे प्रामाणिक ग्रंथ है।
इस ग्रंथ के १३ अध्यायों को 'वैकृतिक रहस्य' के अनुसार तीन मुख्य भागों (चरित्रों) में विभाजित किया गया है। यह विभाजन प्रकृति के तीनों गुणों — तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण — तथा देवी के तीन प्रमुख स्वरूपों से संबंधित है।
दुर्गा सप्तशती के ये तीनों चरित्र केवल कथाएँ नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर चलने वाली चेतना के ऊर्ध्वगमन की वैज्ञानिक प्रक्रिया है।





