विस्तृत उत्तर
महामाया का उल्लेख प्रमुखतः मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य में मिलता है। वहाँ ब्रह्माजी कहते हैं:
'त्वं स्वाहा त्वं स्वधा... त्वं महामाया, जगदम्बिका'
अर्थात् हे देवि, आप ही स्वाहा-स्वधा हैं, आप ही महान विद्या, महामाया और जगत की अंबिका (माता) हैं।
देवी भागवत पुराण में त्रिदेव स्वयं देवी महामाया की स्तुति करते हैं कि 'आप ही आदिशक्ति महामाया हैं, समस्त ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली जननी हैं।'
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