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ग्रंथों में उल्लेख प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

ग्रंथों में उल्लेख से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

कालिका पुराण में महामाया का स्वरूप कैसा बताया गया है?

कालिका पुराण (14वीं सदी): महामाया स्वरूप = दस भुजाएँ + कमल पर आरूढ़ + अन्य योगिनियों से उच्च स्थान। शास्त्रीय निष्कर्ष: महामाया = आद्या शक्ति + संपूर्ण योगिनी-चक्र की अधिपति।

कालिका पुराणदस भुजाएँकमल आसन
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देवी महात्म्य में महामाया की स्तुति कैसे की गई है?

देवी महात्म्य (मार्कण्डेय पुराण): ब्रह्मा की स्तुति — 'त्वं स्वाहा त्वं स्वधा... त्वं महामाया, जगदम्बिका।' अर्थ: हे देवि! आप स्वाहा-स्वधा, महान विद्या, महामाया और जगत की अंबिका हैं। देवी भागवत: त्रिदेव की स्तुति — 'आप आदिशक्ति महामाया, ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली जननी।'

देवी महात्म्यब्रह्मा स्तुतिस्वाहा स्वधा
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महामाया का उल्लेख कौन से ग्रंथों में मिलता है?

महामाया के ग्रंथ: मार्कण्डेय पुराण का देवी महात्म्य (ब्रह्मा की स्तुति), देवी भागवत पुराण (त्रिदेव की स्तुति), रुद्रयामल तंत्र (पराशक्ति), कालिका पुराण (दस भुजाएँ-कमल आसन), स्कंद पुराण (आद्यादेवी)।

महामाया ग्रंथदेवी महात्म्यरुद्रयामल तंत्र
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ग्रंथों में उल्लेख — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ग्रंथों में उल्लेख श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

ग्रंथों में उल्लेख को गहराई से समझने का तरीका

ग्रंथों में उल्लेख प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।