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गणेश कथा प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

गणेश कथा से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों बनाया गया?

गणेश जी प्रथम पूज्य दो कारणों से बने — पहला: पार्वती जी के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने यह वरदान दिया। दूसरा: ब्रह्मांड-परिक्रमा प्रतियोगिता में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके बुद्धि से विजय पाई।

गणेश प्रथम पूज्यविघ्नहर्ताशिव वरदान
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शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर कैसे लगाया?

शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने गणों को उत्तर दिशा में भेजा। वहाँ माँ की तरफ पीठ करके सोते हुए हाथी के बच्चे का सिर लाया गया। शिव जी ने उसे गणेश के धड़ से जोड़कर मंत्रबल से प्राण डाले और गणेश जी पुनर्जीवित हुए।

गणेश हाथी सिरशिव वरदानगजमुख
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पार्वती ने उबटन से गणेश जी को क्यों बनाया?

पार्वती जी ने उबटन से गणेश को इसलिए बनाया क्योंकि शिव के गण नंदी ने शिव जी के आने पर उनकी आज्ञा की अनदेखी की थी। पार्वती को एक ऐसे विश्वस्त गण की जरूरत थी जो केवल उन्हीं की आज्ञा माने।

पार्वती उबटनगणेश जन्मपार्वती गण
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गणेश जी का सिर हाथी का क्यों है, शिव पुराण में क्या कारण बताया है?

शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने क्रोध में गणेश जी का सिर काट दिया था। पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने पुत्र को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। उत्तर दिशा में मिले हाथी के बच्चे का सिर लाकर जोड़ा गया और इस प्रकार गणेश जी गजमुख हुए।

गणेश हाथी सिरशिव पुराणगजमुख
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शनि की दृष्टि से गणेश जी का सिर कैसे जला?

यह कथा मुख्यतः ब्रह्मवैवर्त पुराण में है। शनिदेव की पत्नी ने उन्हें श्राप दिया था कि उनकी दृष्टि से अनिष्ट होगा। पार्वती के आग्रह पर जब शनि ने गणेश को देखा तो उनका सिर धड़ से अलग हो गया। बाद में हाथी का सिर जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया गया।

शनि दृष्टिगणेश सिरब्रह्मवैवर्त पुराण
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गणेश जी के विघ्नहर्ता नाम का क्या कारण है?

लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को देवताओं के शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर करने और दैत्यों के दुष्कर्मों में विघ्न डालने का दायित्व दिया। इसीलिए वे 'विघ्नहर्ता' कहलाए।

विघ्नहर्तागणेशलिंग पुराण
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शिव पुराण के अनुसार गणेश जी का जन्म कैसे हुआ?

शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक बालक की प्रतिमा बनाई और अपनी दिव्य शक्ति से उसमें प्राण डाले। यही बालक गणेश जी कहलाए। पार्वती जी इसलिए एक विश्वसनीय गण चाहती थीं जो केवल उनकी आज्ञा माने।

गणेश जन्मशिव पुराणपार्वती उबटन
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गणेश जी का वाहन मूषक कैसे बना?

गणेश पुराण के अनुसार क्रौंच नामक गंधर्व को इंद्र के श्राप से मूषक बनना पड़ा। पराशर ऋषि के आश्रम में उत्पात मचाने पर गणेश जी ने उसे पकड़ा और उसके अहंकार को चूर करके अपना वाहन बना लिया।

मूषक वाहनगणेशक्रौंच गंधर्व
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गणेश और कार्तिकेय में पृथ्वी परिक्रमा की प्रतिस्पर्धा क्या थी?

भगवान शिव ने ब्रह्मांड परिक्रमा की प्रतियोगिता रखी। कार्तिकेय मोर पर निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने माता-पिता की सात परिक्रमा कर कहा — 'माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं।' इस बुद्धि से गणेश जी प्रथम पूज्य घोषित हुए।

गणेश कार्तिकेयपृथ्वी परिक्रमामाता-पिता परिक्रमा
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शिव ने किस वरदान से गणेश को सभी देवों में अग्रपूज्य बनाया?

शिव जी ने गणेश को तीन वरदान दिए — प्रथम पूजा का अधिकार, विघ्नहर्ता का पद और गणों के अधिपति का पद। साथ ही ब्रह्मा और विष्णु ने भी आशीर्वाद दिया। इस प्रकार गणेश जी सभी देवों में अग्रपूज्य बने।

गणेश अग्रपूज्यशिव वरदानविघ्नहर्ता वरदान
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गणेश कथा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर गणेश कथा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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गणेश कथा को गहराई से समझने का तरीका

गणेश कथा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।