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दैनिक कर्म प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

दैनिक कर्म से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

तुलसी पत्ते तोड़ने के नियम?

न तोड़ें: रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति, रात। कैसे: सुबह, शुद्ध हाथ, 'ॐ तुलस्यै नमः'+क्षमा, दाहिना हाथ, जरूरत जितने। पहले दिन तोड़कर रखें।

तुलसीपत्तेनियम
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पांच महायज्ञ प्रतिदिन करने का विधान?

5 महायज्ञ: 1.ब्रह्म(स्वाध्याय) 2.देव(हवन/पूजा) 3.पितृ(तर्पण) 4.भूत(प्राणी भोजन) 5.अतिथि(सेवा)। = 5 ऋण। आधुनिक: गीता+दीपक+पितर स्मरण+गाय रोटी+मेहमान=15 मिनट।

पंचमहायज्ञनित्य कर्मगृहस्थ
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नया कार्य शुरू करने से पहले कौन सा मंत्र बोलें

नया कार्य शुरू करने से पहले: गणेश वन्दना — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव'। बीज मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (11/21 बार)। ज्ञान कार्य हेतु सरस्वती वन्दना। ऋग्वेद: 'ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे'। गणेश प्रथम पूज्य — सभी शुभ कार्य उनकी वन्दना से आरम्भ होते हैं।

शुभारम्भगणेशविघ्न निवारण
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सूर्य को जल देने की विधि और मंत्र क्या है

तांबे के लोटे में जल + लाल फूल + लाल चन्दन + कुमकुम + अक्षत। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुख कर 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' बोलते हुए जल अर्पित करें। गायत्री मंत्र भी जप सकते हैं। नियमित समय पर करें, बासी जल न चढ़ाएँ।

सूर्य अर्घ्यजल अर्पणसूर्य मंत्र
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सूर्य को जल देते समय किस दिशा में खड़े हों

सूर्य को जल देते समय मुख सदैव पूर्व दिशा (सूर्योदय की दिशा) की ओर रखें। खुले स्थान पर नंगे पैर खड़े होकर, दोनों हाथों से तांबे का लोटा उठाकर धारा से जल अर्पित करें। जल की धारा से सूर्य किरणें देखना शुभ है। पूर्व दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है।

सूर्य अर्घ्यदिशापूर्व दिशा
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भोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

भोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।

भोजन मंत्रब्रह्मार्पणम्अन्नपूर्णा
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यात्रा से पहले कौन सा मंत्र बोलें

यात्रा से पहले: (1) गणेश मंत्र — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव' (2) विष्णु स्मरण — 'मंगलं भगवान् विष्णुः' (3) हनुमान स्मरण। 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार जपें। इष्टदेव को प्रणाम, दही-शक्कर, दाहिना पैर पहले — परम्परागत शुभ विधान।

यात्रा मंत्रगणेशसुरक्षा
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संध्या वंदन की विधि — कितनी बार करें?

3 बार: प्रातः/मध्याह्न/सायं। आचमन→प्राणायाम→सूर्य अर्घ्य→गायत्री 108→उपस्थान→समर्पण। सरल: 5 मिनट=आचमन+प्राणायाम+गायत्री 10। न्यूनतम 1 बार(प्रातः)।

संध्या वंदनत्रिकालगायत्री
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सूर्य को जल देने की विधि — मंत्र?

सूर्योदय, तांबा लोटा(जल+रोली+फूल), पूर्व मुख, खड़े, 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, धीरे जल गिराएँ(इंद्रधनुष)। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, विटामिन D।

सूर्य अर्घ्यजलविधि
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दैनिक कर्म — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दैनिक कर्म श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दैनिक कर्म को गहराई से समझने का तरीका

दैनिक कर्म प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।