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योग और साधना प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

योग और साधना से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की पूजा के लिए 'ब्रह्म मुहूर्त' को ही सबसे श्रेष्ठ क्यों माना गया है?

ब्रह्म मुहूर्त में सत्त्व गुण और प्राण शक्ति चरम पर होती है। इस समय पीनियल ग्रंथि (तीसरा नेत्र) सक्रिय होती है, जिससे कुक्कुटेश्वर लिंग पर की गई साधना सीधे आत्मबोध और परमानंद की ओर ले जाती है।

ब्रह्म मुहूर्तपीनियल ग्रंथिसत्त्व गुण
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कुक्कुटेश्वर शिवलिंग और हठयोग के 'कुक्कुटासन' में क्या संबंध है?

कुक्कुटासन मूलाधार चक्र और कुण्डलिनी जाग्रत करता है। कुक्कुटेश्वर लिंग की साधना इसी यौगिक ऊर्जा का केंद्र है जो आलस्य (तमोगुण) का नाश कर चेतना को ऊपर उठाती है।

कुक्कुटासनमूलाधार चक्रकुण्डलिनी जागरण
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पिंगलेश्वर शिवलिंग पर रात्रि-पूजन (निशि पूजा) का क्या विधान है?

महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि पर यहाँ अर्धरात्रि (महानिशा) में विशेष पूजा का विधान है। तंत्र साधक एकांत में नाड़ी-जागरण का अभ्यास करते हैं और अघोर साधक चिता भस्म से शिव का अभिषेक करते हैं।

निशि पूजामहाशिवरात्रिरात्रि पूजन
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पिंगलेश्वर शिवलिंग को 'सिद्ध क्षेत्र' क्यों माना जाता है?

यह एक सिद्ध क्षेत्र है क्योंकि यहाँ साक्षात् शिव गण 'पिंगल' ने कठोर तपस्या की थी। यहाँ पूर्व काल के सिद्धों की ऊर्जा संचित है जो साधक के संकल्प को तत्काल सिद्ध करती है।

सिद्ध क्षेत्रऊर्जा केंद्रशिव गण
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नंदीशेनेश्वर शिवलिंग पर शक्ति-परीक्षण (अखाड़ा परंपरा) का क्या महत्व है?

यद्यपि पुराणों में इसका सीधा उल्लेख नहीं है, परंतु काशी के अखाड़ों की परंपरा में पहलवान और हठयोगी इस शिवलिंग से आंतरिक बल (वीर-भाव) मांगते हैं। यह स्थानीय अखाड़ा संस्कृति और आगमिक योग का समन्वय है।

शक्ति परीक्षणअखाड़ा परंपरामल्ल विद्या
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पहलवान और हठयोगी नंदीशेनेश्वर शिवलिंग की पूजा क्यों करते हैं?

शिवगण नंदीषेण शारीरिक बल और हठयोग के अधिष्ठाता हैं। यह शिवलिंग 'वीर भाव' और देह-बल को जाग्रत करता है, इसलिए अखाड़े के पहलवान और हठयोगी शारीरिक व यौगिक बल के लिए इसकी पूजा करते हैं।

हठयोगशारीरिक बलअखाड़ा परंपरा
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योग और साधना — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर योग और साधना श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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योग और साधना को गहराई से समझने का तरीका

योग और साधना प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।