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जप नियम प्रश्नोत्तर — 8 प्रश्न

जप नियम से जुड़े 8 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 8 प्रश्न

मंत्र जप के बाद 'क्षमा प्रार्थना' क्यों जरूरी है

जप या पूजा में अनजाने में हुए उच्चारण, विधि या ध्यान के दोषों को मिटाने और अपने अहंकार को नष्ट करने के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना करना अनिवार्य है, तभी अनुष्ठान पूर्ण होता है।

क्षमा प्रार्थनात्रुटि निवारणअहंकार नाश
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मंत्र जप के लिए मंत्रों की गिनती

संकल्पित और सकाम अनुष्ठानों में 108 दानों की माला या कर-माला से सटीक गिनती करना अनिवार्य है। बिना गिनती का जप केवल निष्काम भक्ति के लिए उपयुक्त है।

गिनतीमालासंख्या
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बिना आसन के मंत्र जप का फल

बिना आसन के नंगी जमीन पर बैठकर जप करने से पृथ्वी सारी आध्यात्मिक ऊर्जा सोख लेती है, जिससे जप निष्फल हो जाता है। ऊर्जा संरक्षण के लिए कुशा या ऊनी आसन अनिवार्य है।

आसनऊर्जा नाशनिष्फल जप
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जप माला में सुमेरु का क्या महत्व है और इसे क्यों नहीं पार करते

सुमेरु परमात्मा और गुरु का प्रतीक है। इसे न लांघना आध्यात्मिक अनुशासन और भक्ति की मर्यादा का हिस्सा है।

सुमेरुमालागुरु
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बिस्तर पर बैठकर मंत्र जप करने के क्या नुकसान और नियम हैं

विशेष सिद्धि के लिए बिस्तर पर जप वर्जित है, लेकिन सामान्य 'नाम जप' किसी भी स्थान या अवस्था में किया जा सकता है।

नियमशुद्धिजप
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मंत्र जप करते समय कौन सा नियम मानना चाहिए?

जप नियम: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूर्व-उत्तर मुख, सात्विक भोजन। वर्जित: बात करना, सोना, तर्जनी से माला, सुमेरु लाँघना। जप के बाद कुछ क्षण मौन। कुलार्णव: जप और मंत्र गोपनीय रखें — शक्ति बचती है।

नियमब्रह्मचर्यएकभुक्त
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जप नियम — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर जप नियम श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

जप नियम को गहराई से समझने का तरीका

जप नियम प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

8 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।