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ग्रह दोष निवारण प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

ग्रह दोष निवारण से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

शत्रु और भूत-प्रेत बाधा के लिए बटुक भैरव का कौन सा मंत्र जपें?

शत्रु और भूत-प्रेत बाधा के लिए मंत्र: 'ॐ तीखदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्। भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि।'

शत्रु बाधा मंत्रभूत प्रेतभैरव मंत्र
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शनि राहु दोष निवारण के लिए बटुक भैरव का कौन सा मंत्र जपें?

शनि-राहु दोष के लिए कालाष्टमी पर दीपक जलाकर मंत्र जपें: 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा।'

शनि राहु मंत्रग्रह शांति मंत्रकालाष्टमी
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राहु महादशा में बटुक भैरव की उपासना कैसे करें?

राहु महादशा में कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय...' मंत्र जपें। यह राहु दोष में गागर में सागर जैसा प्रभावी है।

राहु महादशाबटुक भैरवग्रह दोष
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कालसर्प दोष के लिए बटुक भैरव साधना कैसे करें?

कालसर्प दोष के लिए कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर मंत्र जपें: 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा।'

कालसर्प दोषराहुकेतु
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बटुक भैरव साधना से शनि दोष दूर होता है क्या?

हाँ — बटुक भैरव साधना शनि की साढ़े साती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव को कम करने में अद्वितीय रूप से प्रभावी है।

शनि दोषसाढ़े सातीढैय्या
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ग्रह दोष निवारण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ग्रह दोष निवारण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ग्रह दोष निवारण को गहराई से समझने का तरीका

ग्रह दोष निवारण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।