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तीर्थ प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

तीर्थ से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

प्रयागराज संगम स्नान का विशेष महत्व?

प्रयागराज=तीर्थराज। त्रिवेणी(गंगा+यमुना+सरस्वती), ब्रह्मा प्रथम यज्ञ, अक्षयवट। संगम स्नान=करोड़ पुण्य। माघ/कुंभ=विशेष। पिंडदान=गया समान।

प्रयागराजसंगमत्रिवेणी
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कुंभ स्नान का शास्त्रीय आधार?

4 स्थान: प्रयागराज/हरिद्वार/उज्जैन/नासिक — अमृत बूँदें गिरीं। 12 वर्ष=गुरु चक्र। स्कंद पुराण: करोड़ अश्वमेध+करोड़ गंगा फल। गुरु+सूर्य विशेष स्थिति=कुंभ।

कुंभस्नानशास्त्र
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गंगा स्नान का पुण्य क्या मिलता है?

गंगा=पापनाशिनी(स्कंद पुराण)। 1 डुबकी=सभी पाप क्षय। मोक्ष(विष्णु चरणोदक), पितृ तृप्ति, रोग मुक्ति(एंटीबैक्टीरियल), शांति। कुंभ/संक्रांति=करोड़ गुना। गंगाजल कभी खराब नहीं।

गंगास्नानपुण्य
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तीर्थ — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तीर्थ श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

तीर्थ को गहराई से समझने का तरीका

तीर्थ प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।