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नवरात्रि और उपासना प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

नवरात्रि और उपासना से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

स्कंद पुराण के अनुसार विभिन्न आयु की कन्याएं किस देवी का स्वरूप हैं?

स्कंद पुराण: 2 वर्ष = कुमारिका (दुख नाश); 3 = त्रिमूर्ति (धर्म-अर्थ-काम); 4 = कल्याणी (सुख-शांति); 5 = रोहिणी (स्वास्थ्य); 6 = कालिका (शत्रु नाश); 7 = चंडिका (ऐश्वर्य); 8 = शाम्भवी (विजय-लोकप्रियता); 9 = दुर्गा (संकट निवारण); 10 = भद्रा/सुभद्रा (मनोकामना पूर्ति)।

कन्या आयु देवीस्कंद पुराण2 से 10 वर्ष
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कन्या पूजन (कुमारी पूजन) का क्या महत्व है?

कन्या पूजन के बिना नवरात्रि अपूर्ण। महाष्टमी-महानवमी पर कन्याओं को आद्याशक्ति का साक्षात् स्वरूप मानकर पूजा। चरण धोना, कुमकुम टीका, हलवा-पूरी-चना (अष्टमी), तिल-खीर (नवमी)। 'कन्या पूज्या पूज्यतमा सर्वाह' — सभी जातियों की कन्याएं समान रूप से पूजनीय।

कन्या पूजनकुमारी पूजनआद्याशक्ति स्वरूप
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कलश स्थापना (घटस्थापना) का क्या रहस्य है?

कलश = संपूर्ण ब्रह्मांड (हिरण्यगर्भ) और मानव शरीर का सूक्ष्म प्रतीक। पंचमहाभूत संतुलन: जल = जीवन; मिट्टी = पृथ्वी तत्त्व; नारियल = मानव चेतना (सहस्रार चक्र)। इसके द्वारा निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करते हैं।

कलश स्थापनाघटस्थापनापंचमहाभूत
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नवरात्रि का क्या महत्व है?

नवरात्रि (चैत्र और आश्विन): केवल सामान्य पर्व नहीं। देवी भागवत पुराण और तंत्र-आगम: ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) के साथ मानवीय चेतना का तादात्म्य स्थापित करने वाला अत्यंत सूक्ष्म, वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान। ऋतु-परिवर्तन और ब्रह्मांडीय शक्तियों के जागरण का काल।

नवरात्रिब्रह्मांडीय ऊर्जातांत्रिक अनुष्ठान
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नवरात्रि और उपासना — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नवरात्रि और उपासना श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नवरात्रि और उपासना को गहराई से समझने का तरीका

नवरात्रि और उपासना प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।