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तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना प्रश्नोत्तर

तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना से जुड़े 15 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 15 प्रश्न

केतु का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

केतु बीज मंत्र: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' | केतु गायत्री: 'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे, शूलहस्ताय धीमहि, तन्नो केतुः प्रचोदयात्'

केतु बीज मंत्रकेतु गायत्रीअश्वध्वजाय
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राहु का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

राहु बीज मंत्र: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' | राहु गायत्री: 'ॐ नाकध्वजाय विद्महे, पद्महस्ताय धीमहि, तन्नो राहुः प्रचोदयात्'

राहु बीज मंत्रराहु गायत्रीनाकध्वजाय
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शनि का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

शनि बीज मंत्र: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' | शनि गायत्री: 'ॐ काकध्वजाय विद्महे, खड्गहस्ताय धीमहि, तन्नो मंदः प्रचोदयात्'

शनि बीज मंत्रशनि गायत्रीकाकध्वजाय
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शुक्र का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

शुक्र बीज मंत्र: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' | शुक्र गायत्री: 'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे, धनुर्हस्ताय धीमहि, तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'

शुक्र बीज मंत्रशुक्र गायत्रीअश्वध्वजाय
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गुरु (बृहस्पति) का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

गुरु बीज मंत्र: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' | गुरु गायत्री: 'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे, कृणिहस्ताय धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'

गुरु बीज मंत्रबृहस्पति गायत्रीवृषभध्वजाय
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बुध का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

बुध बीज मंत्र: 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' | बुध गायत्री: 'ॐ गजध्वजाय विद्महे, शुकहस्ताय धीमहि, तन्नो बुधः प्रचोदयात्'

बुध बीज मंत्रबुध गायत्रीगजध्वजाय
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मंगल का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

मंगल बीज मंत्र: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' | मंगल गायत्री: 'ॐ वीरध्वजाय विद्महे, विघ्नहस्ताय धीमहि, तन्नो भौमः प्रचोदयात्'

मंगल बीज मंत्रमंगल गायत्रीवीरध्वजाय
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चंद्र का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

चंद्र बीज मंत्र: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः' | चंद्र गायत्री: 'ॐ पद्मध्वजाय विद्महे, हेमरूपाय धीमहि, तन्नो सोमः प्रचोदयात्'

चंद्र बीज मंत्रचंद्र गायत्रीपद्मध्वजाय
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सूर्य का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

सूर्य बीज मंत्र: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' | सूर्य गायत्री: 'ॐ भास्कराय विद्महे, दिवाकराय धीमहि, तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्'

सूर्य बीज मंत्रसूर्य गायत्रीभास्कराय
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नवग्रह पौराणिक स्तोत्र क्या है?

नवग्रह पौराणिक स्तोत्र महर्षि व्यास द्वारा रचित 'नवग्रह स्तोत्र' है — यह भक्तिपूर्ण और उपासना का सरल एवं प्रभावी मार्ग है।

नवग्रह स्तोत्रमहर्षि व्यासभक्तिपूर्ण
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नवग्रह गायत्री मंत्र क्या होते हैं?

नवग्रह गायत्री मंत्र वैदिक संरचना वाले वे मंत्र हैं जो संबंधित ग्रह देवता से हमारी बुद्धि (धी) को प्रकाशित करने की प्रार्थना करते हैं।

गायत्री मंत्रवैदिक संरचनाबुद्धि प्रकाश
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बीज मंत्र क्या होते हैं?

बीज मंत्र एकाक्षरी मंत्र होते हैं जिनमें ग्रह की संपूर्ण शक्ति बीज रूप में समाहित होती है — ये अत्यंत प्रभावशाली होते हैं और ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत करने में सक्षम हैं।

बीज मंत्रएकाक्षरीग्रह शक्ति
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नवग्रह मंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

नवग्रह मंत्र तीन प्रकार के होते हैं: (1) बीज मंत्र — ग्रह शक्ति बीज रूप में, (2) गायत्री मंत्र — बुद्धि प्रकाशित करने की प्रार्थना, (3) पौराणिक स्तोत्र — महर्षि व्यास रचित नवग्रह स्तोत्र।

नवग्रह मंत्र प्रकारबीज मंत्रगायत्री मंत्र
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मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना कैसे होती है?

मंदिरों में नवग्रह स्थापना आगम-शास्त्रों के अनुसार होती है — कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे के सम्मुख नहीं होते क्योंकि यह उनके विशिष्ट और स्वतंत्र ब्रह्मांडीय प्रभाव का प्रतीक है।

नवग्रह स्थापनाआगम शास्त्रसम्मुख नहीं
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तंत्र मार्ग में नवग्रहों की उपासना कैसे होती है?

तंत्र मार्ग भय नहीं, ब्रह्मांडीय शक्तियों से सामंजस्य का मार्ग है — साधक यंत्र, मंडल और मंत्रों से नवग्रह ऊर्जा को अनुकूल बनाता है। तंत्र में मंत्र देवता का शब्द-स्वरूप (नाद-काय) है।

तंत्र उपासनायंत्र मंडल मंत्रब्रह्मांडीय सामंजस्य
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तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना को गहराई से समझने का तरीका

तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

15 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।