विस्तृत उत्तर
मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना आगम-शास्त्रों के नियमों के अनुसार होती है, जिसमें कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे के सम्मुख नहीं होते।
यह उनके विशिष्ट और स्वतंत्र ब्रह्मांडीय प्रभाव का प्रतीक है।
मंदिरों में नवग्रह स्थापना आगम-शास्त्रों के अनुसार होती है — कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे के सम्मुख नहीं होते क्योंकि यह उनके विशिष्ट और स्वतंत्र ब्रह्मांडीय प्रभाव का प्रतीक है।
मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना आगम-शास्त्रों के नियमों के अनुसार होती है, जिसमें कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे के सम्मुख नहीं होते।
यह उनके विशिष्ट और स्वतंत्र ब्रह्मांडीय प्रभाव का प्रतीक है।
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