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कार्तिकेय कथा प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

कार्तिकेय कथा से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

कार्तिकेय को षष्ठी को क्यों पूजा जाता है?

कार्तिकेय को षष्ठी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहते हैं। दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी इस कारण विशेष पर्व है।

कार्तिकेय षष्ठीछठ पूजास्कंद षष्ठी
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छह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय को दूध कैसे पिलाया?

शरवण वन में प्रकट हुए छह शिशुओं का रुदन सुनकर कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ आईं। उनके मन में मातृत्व भाव जागा और उन्होंने एक-एक बालक को अपने स्तन से दूध पिलाया। इसीलिए कार्तिकेय, कृत्तिका-पुत्र 'कार्तिकेय' कहलाए।

कृत्तिकाएंकार्तिकेय स्तनपानषण्मुख
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कार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रमण्यम किस क्षेत्र में कहते हैं?

कार्तिकेय को 'मुरुगन' और 'सुब्रमण्यम' दक्षिण भारत में — विशेषतः तमिलनाडु में — कहा जाता है। तमिल परंपरा में मुरुगन सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं और 'तमिल कडवुल' (तमिलों के देवता) कहे जाते हैं।

मुरुगनसुब्रमण्यमदक्षिण भारत
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कार्तिकेय को छह सिर क्यों हैं?

कार्तिकेय को छह सिर इसलिए हैं क्योंकि उनका दिव्य तेज गंगाजल में बहकर छह भागों में विभाजित हो गया था और छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। माता पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख पुत्र प्राप्त किया।

कार्तिकेय षड्मुखछह सिरशरवण वन
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तारकासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की जरूरत क्यों थी?

तारकासुर ने ब्रह्मा से यह वरदान लिया था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से होगा। उसने यह सोचकर यह माँगा था कि संन्यासी शिव का पुत्र कभी नहीं होगा। इस वरदान को पूरा करने के लिए ही कार्तिकेय का जन्म आवश्यक था।

तारकासुर वरदानशिव पुत्रतारकासुर वध
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शिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।

कार्तिकेय जन्मशिव तेजअग्निदेव
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कार्तिकेय का जन्म क्यों हुआ था?

कार्तिकेय का जन्म तारकासुर के वध के लिए हुआ था। तारकासुर को यह वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से ही होगा। तीनों लोकों में उसके अत्याचार से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय का अवतरण हुआ।

कार्तिकेय जन्मतारकासुरशिव पुत्र
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कार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?

कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।

स्कंदकार्तिकेयस्कंद अर्थ
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कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति किसने बनाया?

कार्तिकेय को तारकासुर के वध के बाद समस्त देवताओं ने — इंद्र के नेतृत्व में — देवताओं का सेनापति बनाया। उनका नाम 'महासेन' भी है जिसका अर्थ महान् सेना का स्वामी है।

कार्तिकेय सेनापतिदेव सेनापतितारकासुर वध
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कार्तिकेय का पालन-पोषण किसने किया था?

कार्तिकेय का पालन-पोषण मुख्यतः कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियों ने किया जिन्होंने उन्हें स्तनपान कराया। इसीलिए वे 'कार्तिकेय' कहलाए। इसके अतिरिक्त गंगा, अग्निदेव और माता पार्वती भी उनकी मातृशक्तियाँ मानी जाती हैं।

कार्तिकेयकृत्तिकाएंषण्मुख
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कार्तिकेय कथा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर कार्तिकेय कथा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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कार्तिकेय कथा को गहराई से समझने का तरीका

कार्तिकेय कथा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।