विस्तृत उत्तर
कार्तिकेय के पालन-पोषण में कई देवी-शक्तियों का अद्भुत योगदान है, इसीलिए उन्हें अनेक माताओं का पुत्र माना जाता है।
जब शरवण वन में छह शिशु प्रकट हुए और रोने लगे, तब कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ — जिनका उल्लेख ज्येष्ठ, कार्तिकी आदि नामों से होता है — धरती पर आईं। उन्होंने उन छह शिशुओं को अत्यंत प्रेम से अपने स्तनों से दूध पिलाया और शांत किया। इन्हीं छह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय का पालन-पोषण किया, इसीलिए उनका नाम 'कार्तिकेय' पड़ा।
कार्तिकेय की अनेक माताएँ मानी जाती हैं — माँ गंगा जिन्होंने उस दिव्य तेज को धारण किया, अग्निदेव जिन्होंने प्रथम उस तेज को संभाला, शरवण वन जहाँ उनका प्रकट होना हुआ, छह कृत्तिकाएं जिन्होंने स्तनपान कराया, और अंततः माता पार्वती जिन्होंने उन छहों को एक करके अपना पुत्र स्वीकार किया।
कार्तिकेय को स्कंद, षड्मुख, शरजन्मा (सरकंडों में जन्मे), महासेन, गुह, शंमुगन और कुमार जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। उन्हें देवताओं का सेनापति बनाने के बाद देवों ने उनकी विधिवत शिक्षा और शस्त्र-प्रशिक्षण का प्रबंध किया, जिससे वे तारकासुर के संहार के लिए पूरी तरह सक्षम हुए।





