विस्तृत उत्तर
स्कन्द पुराण अठारह महापुराणों में आकार की दृष्टि से सर्वाधिक विशाल है। इसमें लगभग ८१,१०० श्लोक हैं — किसी भी अन्य पुराण में इतने श्लोक नहीं हैं। पुराणों की अनुक्रमणिका में इसका तेरहवाँ स्थान है। शिव-पुत्र कार्तिकेय का नाम 'स्कन्द' है और इस पुराण में भगवान स्कन्द द्वारा शिवतत्त्व का वर्णन किया गया है — इसीलिए इसे स्कन्द पुराण कहते हैं। यह मुख्यतः शैव सम्प्रदाय का पुराण है।
यह पुराण केवल श्लोकसंख्या में बड़ा नहीं है — इसके विषयों की विविधता भी अद्भुत है। इसमें छह खण्ड हैं — माहेश्वर खण्ड, वैष्णव खण्ड, ब्रह्म खण्ड, काशी खण्ड, अवन्तिका खण्ड और रेवा खण्ड। काशी खण्ड में काशी के समस्त देवताओं, शिवलिंगों और तीर्थों की महिमा है। वैष्णव खण्ड में जगन्नाथपुरी का वर्णन है। अवन्तिका खण्ड में उज्जैन के महाकालेश्वर का वर्णन है। इस पुराण में बद्रिकाश्रम, अयोध्या, द्वारका, रामेश्वर, कन्याकुमारी आदि तीर्थों की महिमा है। गंगा, नर्मदा, यमुना, सरस्वती आदि नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत-कथा और शिवरात्रि जैसे व्रत-त्योहारों का वर्णन भी इसमें है। यह पुराण आज भी भारत के घर-घर में व्रत-कथाओं के रूप में जीवित है।





