विस्तृत उत्तर
कार्तिकेय को 'स्कंद' कहने के पीछे एक विशेष पौराणिक और व्युत्पत्ति-सम्बन्धी कारण है।
संस्कृत में 'स्कंद' शब्द 'स्कद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'स्खलित होना' या 'गिरना'। इस कारण 'स्कंद' का शाब्दिक अर्थ हुआ — जो स्खलित (गिरकर या बाहर आकर) प्रकट हुआ हो। कार्तिकेय का जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ था, बल्कि शिव के दिव्य तेज के गंगाजल में स्खलित होकर शरवण वन में प्रकट होने से हुआ। इस असाधारण जन्म के कारण ही उन्हें 'स्कंद' कहा गया।
एक अन्य व्याख्या के अनुसार 'स्कंद' का अर्थ है जो शत्रु-सेनाओं को छिन्न-भिन्न कर दे — 'स्कद्' का एक अर्थ 'नष्ट करना' भी है। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति और युद्ध के देवता हैं जिन्होंने तारकासुर की सेना को नष्ट किया।
स्कंद पुराण — जो अठारह महापुराणों में सबसे विशाल पुराण है — के मूल उपदेशक स्वयं कार्तिकेय (स्कंद) ही हैं। इस पुराण में समस्त भारतीय तीर्थों का माहात्म्य संग्रहीत है। कार्तिकेय के अन्य प्रमुख नाम हैं — स्कंद, षण्मुख, षडानन, महासेन, गुह, शरजन्मा, कुमार और कृत्तिकासुत।





