विस्तृत उत्तर
कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति समस्त देवताओं ने मिलकर — विशेषतः इंद्र के नेतृत्व में — तारकासुर के वध के बाद नियुक्त किया था।
पुराणों के अनुसार जब कार्तिकेय का जन्म हुआ, तो वे अद्भुत तेज और शक्ति से संपन्न थे। उन्होंने शीघ्र ही युद्धविद्या और शस्त्रविद्या का ज्ञान प्राप्त किया। इंद्र ने स्वयं उनका स्वागत किया और उन्हें देवसेना (अपनी पुत्री) का पाणिग्रहण कराया। देवताओं ने देखा कि तारकासुर के संहार के लिए यही वह शिव-पुत्र हैं जिनकी आवश्यकता थी।
कार्तिकेय को विशेष दिव्यास्त्र — शक्तिवेल — प्रदान किया गया। तत्पश्चात् उन्होंने तारकासुर के साथ भीषण युद्ध किया और अंततः तारकासुर का वध किया। तारकासुर के वध के बाद देवताओं को उनका खोया हुआ स्वर्ग वापस मिला।
इस अपूर्व विजय के उपलक्ष्य में समस्त देवताओं ने मिलकर कार्तिकेय को 'देवताओं का सेनापति' — सेनापति या महासेन — की उपाधि दी। इंद्र और अन्य देवताओं ने उनकी विजय का उत्सव मनाया। तभी से कार्तिकेय युद्ध और विजय के देवता और देवसेना के सर्वोच्च नायक के रूप में पूजित हैं। उनका एक प्रमुख नाम 'महासेन' भी है जिसका अर्थ है महान् सेना का स्वामी।





