विस्तृत उत्तर
वज्र के निर्माण के तुरंत बाद इंद्र ने वृत्रासुर को युद्ध के लिए ललकारा। यह एक महायुद्ध था जिसमें वृत्र ने इंद्र के जबड़े भी तोड़ दिए। लेकिन इंद्र ने वृत्र के वरदान की काट खोज निकाली। वरदान की शर्तों — न धातु/लकड़ी, न सूखा/गीला, न दिन/रात — को ध्यान में रखते हुए इंद्र ने गोधूलि के समय (जो न दिन था न रात) समुद्र के फेन (जो न सूखा था न गीला) में वज्र को छिपाकर वृत्र पर प्रहार किया। वज्र के प्रहार से वृत्र का अंत हो गया और ब्रह्मांड में रुका हुआ जल फिर से नदियों के रूप में बहने लगा।
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