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विस्तृत उत्तर
अमृत प्राप्त करने की यात्रा के दौरान गरुड़ की भेंट देवराज इंद्र से हुई। इंद्र ने गरुड़ की शक्ति को स्वीकार करते हुए उन्हें यह वरदान दिया कि आज से सभी नाग (सर्प) उनका प्राकृतिक भोजन होंगे। इस वरदान से गरुड़ और नागों की शाश्वत शत्रुता पर दैवीय मुहर लग गई और यही शत्रुता गरुडास्त्र की शक्ति का मूल आधार बनी।
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