विस्तृत उत्तर
वज्र देवराज इंद्र का प्रमुख और सर्वाधिक प्रसिद्ध अस्त्र है। यह वैदिक और पौराणिक दोनों परंपराओं में सर्वाधिक उल्लिखित दिव्यशस्त्र है।
भगवद्गीता में उल्लेख — भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा है — 'आयुधानामहं वज्रम्' — अर्थात अस्त्र-शस्त्रों में मैं वज्र हूँ। यह वज्र की सर्वोच्च महत्ता का प्रमाण है।
वज्र की विशेषता — वज्र अत्यंत अचूक, अपराजेय और शक्तिशाली अस्त्र था। ऋग्वेद में वज्र का विस्तृत उल्लेख है। यह इंद्र का नित्य अस्त्र था जो उनके हाथ में सदैव रहता था। इसका उपयोग बिजली की तरह प्रहार करने के लिए होता था।
निर्माण की विशेषता — यह सामान्य धातु से नहीं बल्कि महर्षि दधीचि की अस्थियों से बना था — इसीलिए यह अप्रतिम शक्तिशाली था। विश्वकर्मा ने दधीचि की हड्डियों से इसका निर्माण किया था।
वज्र के तीन गुण — श्रीमद्भागवत में वृत्रासुर ने स्वयं कहा कि वज्र में तीन शक्तियाँ हैं — भगवान नारायण की शक्ति, दधीचि ऋषि की तपस्या और इंद्र का प्रारब्ध।





