विस्तृत उत्तर
वासवी शक्ति महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध का एक अद्वितीय और अमोघ दिव्यास्त्र था। यह कोई सामूहिक विनाश का हथियार नहीं था, बल्कि एक ऐसा अस्त्र था जिसे केवल एक बार चलाया जा सकता था और जिसका लक्ष्य कभी चूक नहीं सकता था। इसकी शक्ति इसकी मारक क्षमता में नहीं, बल्कि इसकी अचूकता और एकल-प्रयोग की शर्त में निहित थी। यह एक ऐसा हथियार था जिसने युद्ध की पूरी रणनीति पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रखा था। पांडवों और विशेष रूप से भगवान कृष्ण की हर योजना इस एक लक्ष्य के इर्द-गिर्द घूमती थी कि कैसे भी करके इस अस्त्र को अर्जुन के अलावा किसी और लक्ष्य पर व्यर्थ करवाया जाए।
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