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विस्तृत उत्तर
बाल्यकाल में हनुमान ने उगते हुए सूर्य को एक पका हुआ फल समझ लिया और उसे खाने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। सूर्य को इस तरह निगले जाने से बचाने के लिए इंद्र ने क्रोध में आकर हनुमान पर वज्र से प्रहार किया। यह प्रहार हनुमान की ठोड़ी पर लगा, जिससे वह टूट गई और वे मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े।
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