विस्तृत उत्तर
कार्तिकेय को षष्ठी (छठ) तिथि को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार इसी तिथि को उनका जन्म हुआ था।
पुराणों में उल्लेख है कि भगवान कार्तिकेय का जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। इस कारण इस तिथि को 'स्कंद षष्ठी' या 'सुब्रमण्य षष्ठी' के रूप में विशेष रूप से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में कार्तिक मास की शुक्ल षष्ठी को 'स्कंद षष्ठी' का महत्वपूर्ण पर्व मनाया जाता है जो तमिलनाडु में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
कार्तिकेय की पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहा जाता है। कुछ परंपराओं में मान्यता है कि देवसेना देवराज इंद्र की पुत्री हैं जिनका विवाह कार्तिकेय से हुआ। षष्ठी माता शिशुओं और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं।
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला 'छठ पर्व' भी षष्ठी से संबंधित है, हालाँकि यह मुख्यतः सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। इस पर्व में 'षष्ठी माता' का आशीर्वाद भी माँगा जाता है। कार्तिकेय की पूजा के संदर्भ में षष्ठी तिथि को उनके जन्म दिवस के रूप में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त उनसे बल, बुद्धि और विजय का आशीर्वाद माँगते हैं।




