कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को षष्ठी को क्यों पूजा जाता है?कार्तिकेय को षष्ठी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहते हैं। दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी इस कारण विशेष पर्व है।#कार्तिकेय षष्ठी#छठ पूजा#स्कंद षष्ठी
व्रत एवं त्योहारछठ पूजा में अर्घ्य देने की विधि क्या है?छठ में दो अर्घ्य होते हैं — तीसरे दिन संध्या में डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को। बाँस के सूप में प्रसाद सजाकर, जल में खड़े होकर तांबे के लोटे से जल-दूध मिश्रित अर्घ्य दिया जाता है। 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र के साथ हाथ सिर के ऊपर रखकर सूर्य को अर्पण किया जाता है।
त्योहार पूजाछठ पूजा में कौन कौन से फल अर्पित करने चाहिए?छठ फल: केला, नारियल, गन्ना, सुथनी (अनिवार्य)। सीताफल, सेब, संतरा, अमरूद, नींबू। + ठेकुआ, चावल, पान। बाँस सूप। ताजा-शुद्ध।#छठ पूजा#फल#अर्घ्य
त्योहार पूजाछठ पूजा की विधि क्या है और सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?छठ पूजा 4 दिन: नहाय-खाय → खरना (निर्जला, शाम खीर-प्रसाद) → षष्ठी संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को, कमर तक जल में) → सप्तमी प्रातः अर्घ्य (उगते सूर्य)। बाँस सूप में ठेकुआ-फल-गन्ना। 'ॐ सूर्याय नमः।' कठोरतम व्रत।#छठ पूजा#सूर्य अर्घ्य#छठी मैया