विस्तृत उत्तर
तारकासुर के वध के लिए विशेष रूप से शिव-पुत्र की आवश्यकता थी क्योंकि यही तारकासुर के वरदान की शर्त थी।
पुराणों के अनुसार तारकासुर ने ब्रह्मा की घोर तपस्या करके वरदान माँगा था — 'मेरा वध केवल शिव के पुत्र से ही संभव हो, और किसी से नहीं।' ब्रह्मा ने यह वरदान दे दिया। तारकासुर ने यह सोचकर यह वरदान चुना था कि शिव तो परम वैरागी और तपस्वी हैं — उनका विवाह और पुत्रोत्पत्ति असंभव है, इसलिए वह व्यावहारिक दृष्टि से अवध्य हो जाएगा।
ब्रह्मा के वरदान को पूर्णतः निष्फल नहीं किया जा सकता था। इसलिए इंद्र और अन्य देव भगवान विष्णु के पास गए, परंतु विष्णु ने भी स्पष्ट किया कि तारकासुर को केवल शिव-पुत्र ही मार सकता है। किसी अन्य देवता या दिव्यास्त्र से उसका वध नहीं होगा।
इसीलिए समस्त देवताओं ने एक महत्वपूर्ण योजना बनाई — पहले कामदेव से शिव की तपस्या भंग करवाई जाए, फिर पार्वती का शिव से विवाह हो, और उनसे एक पुत्र का जन्म हो जो तारकासुर का नाश करे। यह पूरी श्रृंखला — सती का वियोग, पार्वती का जन्म, उनकी तपस्या, कामदेव का बलिदान, शिव-पार्वती विवाह और अंततः कार्तिकेय का जन्म — सब तारकासुर-वध की इसी अनिवार्यता के कारण घटित हुई।





