विस्तृत उत्तर
सती के शरीर-त्याग के बाद शिव घोर वैराग्य में चले गए और अपनी परम समाधि में लीन हो गए। इसी अवधि में, तारकासुर नामक एक महापराक्रमी असुर ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर यह वरदान प्राप्त कर लिया कि उसकी मृत्यु केवल 'शिव के पुत्र' के हाथों ही हो सकती है।
तारकासुर यह भली-भांति जानता था कि सती के वियोग में शिव अब कभी विवाह नहीं करेंगे, इसलिए वह स्वयं को पूर्णतः अमर मानकर स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल — तीनों लोकों में भयंकर अत्याचार करने लगा।





