विस्तृत उत्तर
सती के आत्मदाह के पश्चात भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उनके क्रोध की ज्वाला से वीरभद्र की उत्पत्ति हुई, जिसने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर धड़ से अलग कर दिया। बाद में देवताओं की प्रार्थना पर शिव ने दक्ष को बकरे का सिर लगाकर जीवित किया।
इसके पश्चात, भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर संपूर्ण ब्रह्मांड में विक्षिप्त अवस्था में भ्रमण करने लगे। शिव के इस प्रलयंकारी शोक से संपूर्ण सृष्टि के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया। सृष्टि को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को कई खंडों में विभाजित कर दिया। सती के शरीर के अंग पृथ्वी पर जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान 'शक्तिपीठ' कहलाए, जो आज भी शाक्त संप्रदाय के प्रमुख तीर्थस्थल हैं।





