विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र की यात्रा शिव पुराण और अन्य पुराणों में वर्णित एक लंबी परंपरा है।
मूल क्रम — शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) के अनुसार सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शिव ने किया था। विष्णु की 1000 कमल की पूजा और एक नेत्र-अर्पण से प्रसन्न होकर शिव ने यह चक्र विष्णु को प्रदान किया। विष्णु के पास से यह चक्र माता पार्वती को मिला। पार्वती से यह चक्र अग्निदेव के पास पहुँचा और अग्निदेव से वरुणदेव को मिला।
परशुराम को प्राप्ति — वरुणदेव से यह सुदर्शन चक्र भगवान परशुराम को प्राप्त हुआ। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं और भगवान शिव के परम भक्त हैं — इसलिए यह चक्र उनके योग्य था।
चक्र की प्राप्ति का प्रयोजन — परशुराम इस चक्र की नित्य पूजा-अर्चना करते थे। उन्हें ज्ञात था कि यह चक्र उन्हें धर्म-रक्षा के लिए मिला है और जब आवश्यक हो तब इसे योग्य उत्तराधिकारी को सौंपना है।





