लोकपुष्कर द्वीप के मानसोत्तर पर्वत पर किन देवताओं की राजधानियाँ हैं?मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र (पूर्व), यम (दक्षिण), वरुण (पश्चिम) और चंद्र देव (उत्तर) की राजधानियाँ हैं। यह स्वर्लोक का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है।#मानसोत्तर पर्वत#पुष्कर द्वीप#इन्द्र
लोकमानसोत्तर पर्वत क्या है?मानसोत्तर 10,000 योजन ऊँचा पर्वत है जो पुष्कर द्वीप के मध्य में है। इस पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं — यह स्वर्लोक का प्रशासनिक केंद्र है।#मानसोत्तर पर्वत
दिव्यास्त्रपरशुराम ने सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त कियासुदर्शन चक्र शिव → विष्णु → पार्वती → अग्नि → वरुण की परंपरा से परशुराम को मिला। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए यह चक्र उनके पास धरोहर के रूप में था।#सुदर्शन चक्र#परशुराम#वरुण
लोकद्वादश आदित्यों के नाम क्या हैं?द्वादश आदित्य हैं: इन्द्र, धाता, भग, पूषा, मित्र, वरुण, अर्यमा, विवस्वान, सविता, त्वष्टा, विष्णु और अंश।#द्वादश आदित्य नाम#इन्द्र#मित्र
लोकजनलोक में किस देवता को दिशा-रक्षक माना गया है?वरुण देवता को प्रतीकात्मक रूप से जनलोक का दिशा-रक्षक माना गया है।#जनलोक#वरुण#दिशा रक्षक
दिव्य स्वरूप और प्रतीकशंख का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?शंख = वरुण देव का प्रदान। प्रतीक: नाद (ध्वनि) और ब्रह्मांडीय ॐकार। यह सृष्टि की उत्पत्ति के मूल नाद का प्रतिनिधित्व करता है।#शंख#नाद ब्रह्म#ॐकार
वेद ज्ञानवेदों में धर्म का अर्थ क्या है?वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।#धर्म#वेद#ऋत
वेद ज्ञानवेदों में देवताओं का वर्णन कैसे है?वेदों में 33 देव हैं — 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य और इंद्र-प्रजापति। इंद्र और अग्नि के सर्वाधिक सूक्त हैं। ऋग्वेद (1/164/46) के अनुसार सभी देवता उसी एक ब्रह्म के विभिन्न रूप हैं।#देवता#वेद#ऋग्वेद
अस्त्र शस्त्रगांडीव धनुष अर्जुन को कैसे मिला?खांडव वन दहन प्रसंग में अग्निदेव की सहायता पर, वरुणदेव ने गांडीव धनुष और दो अक्षय तरकश अर्जुन को दिए। अग्निदेव ने यह धनुष अर्जुन के लिए वरुण से लाया था।#गांडीव#अग्नि देव#खांडव वन