विस्तृत उत्तर
गांडीव धनुष की उत्पत्ति और अर्जुन को प्राप्ति की कथा महाभारत के आदिपर्व में खांडव दहन प्रसंग से जुड़ी है।
गांडीव का निर्माण — एक कथा के अनुसार इसे ब्रह्माजी ने ऋषि कण्व के शरीर की दिव्य बांस से बनाया था। कालांतर में यह वरुणदेव के पास आया। दूसरी कथा के अनुसार यह विश्वकर्मा ने बनाया था।
अर्जुन को प्राप्ति — राजा श्वेतकि के 12 वर्षीय यज्ञ से अग्निदेव की पाचन शक्ति कमजोर हो गई थी और वे खांडव वन जलाकर तृप्त होना चाहते थे, परंतु देवराज इंद्र अपने मित्र तक्षक नाग की रक्षा के लिए रुकावट डाल रहे थे। तब अग्निदेव ने ब्रह्मन् के वेश में श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास आकर खांडव वन जलाने में सहायता माँगी।
जब अर्जुन ने कहा कि उनके पास उपयुक्त धनुष नहीं है, तब अग्निदेव ने वरुणदेव का आह्वान किया। वरुण ने गांडीव धनुष, दो अक्षय तरकश और दिव्य घोड़ों सहित एक रथ (जिस पर कपिध्वज थी) अर्जुन को दिए। इसी खांडव दहन में अग्निदेव ने श्रीकृष्ण को एक चक्र और कौमोदकी गदा भी भेंट की।





